गणेश चतुर्थी 2022 पंडित प्रदीप मिश्रा

गणेश चतुर्थी 2022 – पंडित प्रदीप मिश्रा

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वर्ष 2022 में 31 अगस्त को गणेश चतुर्थी का आगमन हो रहा है.

गणेश चतुर्थी 2022: शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी बुधवार, 31 अगस्त 2022
शुभ मुहूर्त1. सुबह 6:12 से 9:19 तक
2. सुबह 10:53 से 12:21 तक
अनंत चतुर्दशीशुक्रवार, 9 सितंबर 2022

घर में गणेश जी की स्थापना कैसे करें?

सभी भक्तों के मन में यह प्रश्न रहता है कि गणेश जी की किस प्रकार स्थापना करें और किस प्रकार से पूजा अर्चना करें इसलिए सभी भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि जब भी आप मूर्ति या श्री विग्रह अर्थात गणेश जी की मूर्ति को ला रहे हैं तो उसे लाल रंग के कपड़े लपेट कर लाए।

घर पर लकड़ी की बनी चौकी रखे उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाया और कंकू चावल लगाए।

फिर जिस स्थान पर गणेश जी की स्थापना करनी है उस पर गंगाजल या कोई सी भी पावन नदी का जल थोड़ा सा अर्पित करें।

फिर एक कलश में पानी भरकर उस पर पांच पत्ते आम के लगाकर नारियल रखकर उसकी पूजा-अर्चना कम को चावल से करें।

गणेश पुराण, रूद्र पुराण और शिव महापुराण में कई बार यह कथा आती है कि किस प्रकार से गणेश जी का आगमन हुआ।

जिस में सबसे प्रसिद्ध कथा यह है कि जब माता पार्वती स्नान के लिए लिए जाती है तो उनके हदय में ममता और वात्सल्य रस का आगमन होता है।
इसी वात्सल्य रस के चलते वह हल्दी से गणेश जी की प्रतिमा बनाती है और उनकी प्राण प्रतिष्ठा करती हैं।

इसलिए गणेश जी को कई बार प्रेमा मूर्ति कहकर भी संबोधित किया जाता है।

गणेश चतुर्थी 2022 – पंडित प्रदीप मिश्रा

सभी भक्तों को यह विशेष तौर पर याद रखना चाहिए कि जिस प्रकार से भक्तों के ह्रदय में शिव जी का एक विशेष स्थान होता है उसी प्रकार गणेश जी का भी स्थान हमारे ह्रदय में बहुत ही महत्वपूर्ण जगह है।

गणेश चतुर्थी
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  1. शिव महापुराण कहती है कि यह आवश्यक नहीं है की हम गणेश जी की विशालतम मूर्ति स्थापित करें। गणेश चतुर्थी पर गणेश जी बिठाने का अर्थ कतई नहीं यह नहीं है कि हम बड़े बड़े गणेश जी को स्थापित करें क्योंकि जितनी बड़ी मूर्ति होगी उतनी ही ज्यादा सेवा करनी होगी अगर सेवा में चूक हो तो यह भगवान को कष्ट पहुंचाती है और एक भक्त या कभी नहीं चाहता कि उसके द्वारा प्रभु को कष्ट पहुंचे परंतु आपके पास यदि पर्याप्त रूप में संसाधन है तो आप विशालतम मूर्ति भी स्थापित कर सकते हैं। गणेश पुराण तो यहां तक कहते है कि अगर भक्त श्रद्धा पूर्वक गोल सुपारी को नाडा बांधकर भी गणेश जी मान के पूजा करे तो वह भी फल देते हैं जिस प्रकार से श्री गणेश का श्री विग्रह हमारे घर में स्थापित हो।
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  1. भक्तों के मन में हमेशा यह प्रश्न आता है कि किस प्रकार की मूर्ति हम गणेश जी की लाए ताकि घर में धन संपदा और वैभव का आगमन हो और घर से सारी दुख तकलीफों का नाश हो। गणेश पुराण में इसका स्पष्ट उल्लेख आता है कि जिन गणेश जी के कमर पर या तो सांप बंधा हो या गले से लेकर कमर तक में जनेऊ हो, इस प्रकार की मूर्ति घर में आनंद, वैभव और रिद्धि सिद्धि का आगमन करती है।
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  1. भक्तों को है विशेष तौर पर याद रखना चाहिए कि हम बेलपत्र और शमी पत्र मात्र शिव जी और गणेश जी को ही चढ़ा सकते हैं । गणेश पुराण में ऐसा वर्णन आता है कि यदि भक्त श्रद्धा पूर्वक गणेश जी को दसों दिन शमी पत्र चढ़ाता है तो उसे हर उस इच्छा की प्राप्ति होती है जो वह चाहता है।
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  1. भक्तों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि शिवलिंग में ही शिवजी के समस्त परिवार का निवास होता है, जिस प्रकार से जलधारी में माता पार्वती और अशोक सुंदरी , जहां पर जल गिरता है अर्थात जलधारी के दाएं तरफ गणेश जी और बाएं तरफ कार्तिकेय का निवास होता है, इसलिए भक्तों को विशेष तौर पर शिवलिंग के सभी जलधारी और शिव जी का अभिषेक कर उनके समस्त परिवार को प्रसन्न करना चाहिए।
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  1. भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि परिवार में किसी बीमारी की समस्या है तो गणेश चतुर्थी से से लेकर जब तक गणेश जी का विसर्जन नहीं होता हमें गणेश जी को पांच पत्तियां शमी की और शिव जी को तीन पत्तियां शमी की अर्पित करना है और इस समय जब भी हम मंदिर जाए , तो पूजा करने के बाद मंदिर के उल्टे हाथ पर एक पत्र शमी का और घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें, यह उपाय निश्चित तौर पर हमारे परिवार और घर में सुख शांति कॉल आता है और समस्त दुखों का नाश करता है।
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  1. भक्तों को यह विशेष तौर पर याद रखना चाहिए कि जब भी हमारे घर में गणेश जी का आगमन होता है तो गणेश जी अपने साथ रिद्धि सिद्धि ,संपदा ,धन वैभव और आनंद लाते हैं परंतु जब हम उनका विसर्जन कर देते हैं तो वह भी उनके साथ चले जाती है इसलिए भक्तों को हमेशा याद रखना चाहिए कि गणेश जी स्थापित करते समय उनकी दोनों तरफ एक तरफ कुमकुम से और दूसरी तरफ हल्दी से स्वास्तिक बनाना चाहिए, क्योंकि यह स्वास्तिक रिद्धि सिद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। जिस प्रकार से हम जानते हैं कि किसी भी परिवार में बेटे को कहीं ना कहीं बाहर कमाने के लिए जाना पड़ता है परंतु बहू हमेशा घर में ही रहती है उसी प्रकार से गणेश जी के जाने पर भी रिद्धि-सिद्धि का वास हमेशा भवन में रहता है।
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  1. गणेश पुराण में यह स्पष्ट कहा गया है कि जब गणेश जी को विसर्जित करना है तो भक्तों को यह विशेष ध्यान रखना चाहिए कि गणेश जी को किसी तालाब नदी और एक विशेष स्वच्छ स्थान पर ही विसर्जित करें, परंतु आजकल हम देखते हैं कि हम गणेश जी की विशालतम मूर्तियां तो ले आते हैं परंतु हम उन्हें ऐसी जगह विसर्जित करते हैं जहां पर स्वच्छता का नाम मात्र नहीं होता और वहां पर नदी की जगह केवल नाले ही होते हैं। इसलिए भक्तों को गणेश जी को साफ स्वच्छ पानी नहीं विसर्जित करना चाहिए और अगर गणेश जी का आकार छोटा है तो उन्हें मिट्टी में समर्पित करके उस पर जल डाले यह भी विसर्जन के बराबर ही माना जाता है।

जिस प्रकार से हमें रूद्र पुराण और शिव महापुराण में यह वर्णन मिलता है कि हमारे शिव जी कितने भोले हैं और वह भक्त के निश्चल प्रेम से ही प्रसन्न होते हैं ठीक उसी प्रकार से गणेश जी भी बहुत ही दयालु और करुणा निधान है, वह भी मात्र निश्चल प्रेम और सेवा के द्वारा ही बंदे जाते हैं।

भक्तों का कर्तव्य होता है कि इन 10 दिनों में गणेश जी की ऐसी सेवा करें जिससे गणेश जी प्रसन्न हो और जिस प्रकार से एक सच्चा मित्र मुश्किल के समय में एक मित्र की मदद करता है ठीक उसी प्रकार से गणेशजी जीवन पर्यंत तक हमारी चिंता करते हैं।

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