हर समस्या का हल - पंडित प्रदीप जी मिश्रा

हर समस्या का हल – पंडित प्रदीप जी मिश्रा

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शिव महापुराण में वर्णन आता है कि कोई सी भी बड़ी से बड़ी समस्या जो सुमेरु पर्वत के समान दिखाई पड़ती होचाहे वह भौतिक हो या आध्यात्मिक केवल हरि के नाम में ही इतना सामर्थ है कि उस बड़ी से बड़ी समस्या को भी हल कर दे, उसी प्रकार से भौतिक समस्याएं जो चाहे धन के अभाव के कारण आ रही हो मन में शांति का स्थापन ना होने के कारण आ रही हो उसका केवल एक ही उपाय है ” पशुपति व्रत “।

शिव महापुराण और रुद्र महापुराण के अनुसार समस्त संसार की समस्त समस्याओं का निवारण करने का सामर्थ्य रखता है पशुपति व्रत , यह व्रत का पालन करने से मनुष्य में इतना सामर्थ्य आ जाता है कि वह हर समस्या का निवारण कर सके।

आजकल के जो रूढ़िवादी और मायावादी लोग हैं उन्होंने पशुपति व्रत को बहुत ही कठिन बताया है परंतु असल मायनों में पशुपति व्रत बहुत ही सुगम है यह तो रूढ़िवादी और मायावादी मनुष्यों ने अपने धर्म के धंधे को चलाने के लिए इसमें षड्यंत्र का मेल मिलाया है।

जिस प्रकार से एक भक्त में ही इतना सामर्थ्य है कि वह भगवान को पूर्ण रूप से जान सके उसी प्रकार से सभी भक्तों को केवल उन उपायों को करना चाहिए जो परम भक्त के निर्देशन में दिए गए हो।

शिव महापुराण के अनुसार पशुपति व्रत में ज्यादा कुछ नहीं करना होता सुबह की पूजा-अर्चना का इसमें बहुत महत्व होता है ।

इस व्रत में सुबह शिव का अभिषेक दुग्ध और जल द्वारा किया जाता है और चंदन को जलधारी के हिस्से को छोड़कर बाकी बचे हुए हिस्से पर लगाया जाता है क्योंकि रूद्र पुराण शिव पुराण के अनुसार जलधारी में स्वयं माता पार्वती और शिव पार्वती की पुत्री अशोक सुंदरी का निवास होता है।

शाम के समय भक्तों को वापस में मंदिर में शिव का अभिषेक मात्र जल से करना होता है इसके साथ ही भक्तों को 6 दिए घर से मंदिर में लाना होता है, भगवान पशुपति अर्थात शिव के लिए बना हुआ कुछ मीठे का भोग उसके तीन हिस्से कर के मंदिर में भोग अर्पण करना होता है और बचा हुआ भोग का एक हिस्सा पुनः घर में लाना होता है और ध्यान रहे कि छह की छह दिए हमें मंदिर में प्रज्वलित नहीं करने हैं उसमें से केवल 5 को ही प्रज्वलित कर शिव को अर्पण करें और बाकी का बचा एक दिया घर में लाकर उसे प्रज्वलित कर घर की चौखट के दाया हिस्से पर रखे।

भक्तों को यह स्मरण रखना चाहिए कि जिस भक्तों ने व्रत पालन का संकल्प लिया है वही प्रसाद को पहले पावे और उसके बाद भोजन करें , शिव महापुराण में पांच व्रत करने का नियम है और 5 वर्ष पूर्ण होने पर छठे व्रत में पूजा अर्चना करते समय शिव को हृदय से धन्यवाद कहे , और शिव से यह वरदान मांगे की है शिव मुझे आपका निश्चल प्रेम प्रदान करें।

छठे व्रत मेंदाल, चावल, आटा ड्राई फ्रूट या कुछ भी दान करें। भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि पांचो व्रत पूर्ण होने पर शिव को श्रीफल ₹11 और 108 बेलपत्र शिव को अर्पण करें।

विशेष तौर पर भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस मंदिर में वह पांचो व्रत का पालन करेगा , उसे उस व्रत की सारी विधियां और पूजा अर्चना उसी मंदिर में करनी होगी , चाहे कैसी भी परिस्थितियां हो परंतु उसे उस ही मंदिर में अपने संपूर्ण व्रत को पालन करना है।

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