कुब्रेश्वर धाम की महिमा - पंडित प्रदीप मिश्रा

कुब्रेश्वर धाम की महिमा – पंडित प्रदीप मिश्रा

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कुब्रेश्वर धाम की महिमा – पंडित प्रदीप मिश्रा

सभी शिव भक्तों को जानकार बहुत अधिक प्रसन्नता होगी कि श्रावण मास के पावन महीने में हम कुबेरेश्वर धाम की महिमा को जानेंगे.
जैसा की शिव पुराण और रूद्र पुराण के अनुसार भी हम जानते हैं कि हर धाम की महिमा अलग और विशेष होती है होती है.

परंतु सभी धाम में एक बात यह विशेष होती है कि यह भक्तों को सुखदाई प्रसन्नता और आनंद प्रदान करती है और उनके सभी दुखों को हर कर भगवान भक्ति में लीन होने की प्रेरणा देती है.

उदाहरण के तौर पर अगर हम महाकालेश्वर जो उज्जैन में स्थित है ज्योतिर्लिंग का मात्र दर्शन कर लेते हैं, तो उस सुखदाई और मंगलमय दर्शन की इतनी महिमा है कि रूद्र पुराण में वर्णन आता है कि भक्तों को कभी भी काल के दर्शन नहीं करने पड़ते इसका अर्थ यह है कि उसको मृत्यु के समय यमराज वह यातनाएं और पीड़ा नहीं देते जो एक नास्तिक को भोगनी पड़ती है.

शास्त्रों में भी ऐसे कई उल्लेख आते हैं जो धामों की महिमा का वर्णन करते हैं. क्योंकि यह धाम अपने आप में बहुत अति पावन और पवित्र होते हैं क्योंकि भगवान के धाम में स्वयं भगवान निवास करते हैं.

और जब भगवान के बुलावे पर हम धाम को जाते हैं तो इसका अर्थ हुआ कि हम भगवान के घर जा रहे हैं जो हमारा प्रभु के प्रति घनिष्ठ प्रेम और भक्ति भाव को स्पष्ट करता है.

उदाहरण के तौर पर जब हम रामेश्वरम के दर्शन करते हैं तो इस रामेश्वरम की ऐसी महिमा है कि वहां पर रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से स्वयं देवाधिदेव शिव यह आश्वासन देते हैं कि मनुष्य राम भक्ति में आगे बढ़ेगा.

ऐसी ही महिमा है , कुबेरेश्वर धाम की.

जिस प्रकार से जब कभी भी वैष्णव साधु, संत किसी भी राजा के वहां जाते हैं तो वह खाली हाथ नहीं आते. और राजा का भी है कर्तव्य होता है कि वह सभी साधु संतों और वैष्णव का सादर सत्कार करके, उन्हें प्रसन्न कर अपने आध्यात्मिक जीवन में प्रगति करें.

ठीक उसी प्रकार से जब कोई भी भक्तों को कुबेरेश्वर धाम की महिमा को जानता है उसका श्रवण करता है और यहां तक कि वहां दर्शन करने के लिए लालायित होकर जाता है. वह शिव की कृपा से कभी भी खाली हाथ नहीं आता.

शिव तो इतने कृपा निधान है कि मात्र एक लोटा जल का अभिषेक करने से ही इतने प्रसन्न हो जाते हैं कि भक्तों की सारे दुखों को हर कर सुख प्रदान करते हैं.

कुबेरेश्वर धाम महिमा में यह कथा का भी वर्णन आता है कि किस प्रकार से कुबेरेश्वर महादेव ने तलवार के घाव को सुई की नोक के बराबर कर दिया था.

और श्रावण मास में इस धाम को जाना और प्रभु के दर्शन करना अति फलदाई होता है, रुद्रपुर आने में यह भी वर्णन आता है कि किस प्रकार से सुयशा ने नंदेश्वर को कह कर श्रावण मास में शिवलिंग का निर्माण कर उसकी पूजा-अर्चना की और शिव को बहुत ही प्रसन्न कर दिया.

इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि पति और पत्नी का यह दायित्व होता है कि पति , पत्नी की भक्ति में उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें और पत्नी को पति के कार्यों में और आध्यात्मिक कार्यों में साथ देकर अपने दांपत्य जीवन को सफल बनाएं.

पिछले गत दिनों में जो इंदौर में कथा हुई थी उसमें भी कुबेरेश्वर धाम की महिमा का वर्णन किया गया था . जिसमें यह बताया गया कि किस प्रकार इंदौर के भक्तों को शिव की कृपा प्राप्त हुई.

पत्र में वह महोदय पंडित मिश्रा जी को बहुत लिखती है कि जब उसने सोनोग्राफी करवाई तो डॉक्टरों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आप के गर्भ में जो बच्चा है वह पैदा होने के बाद विकलांग होगा , इस भाई में यह शिव की कृपा ही माने की किसी प्रकार से मुझे ज्ञात हुआ कि शिव को जल चढ़ाने से यह समस्या का भी निदान हो जाएगा , मैंने नित्य प्रतिदिन शिव को जल अर्पित करना प्रारंभ किया, उसी की ऐसी कृपा हुई कि वह बच्चा विकलांग ना पैदा होकर मात्र कमजोरी से ग्रसित था.

बड़े बुजुर्गों के कहने पर मैं उसे सीहोर ले आई शिवलिंग पर जो जल अर्पित होता है उसका जरा सा जल लेकर दूध में मिलाकर उस बच्चे को देने लगी.

शिव की ऐसी कृपा हुई कि बच्चे की कमजोरी का भी नाश हुआ और वहां विकलांग ना होकर स्वस्थ हो गया.

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|| श्री शिवाय नमस्तुभ्यं ||

Pandit Pradeep Mishra

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