नवरात्रि की महिमा (दुर्गा नवरात्रि 2022)

नवरात्रि की महिमा (दुर्गा नवरात्रि 2022)

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नवरात्रि की महिमा (दुर्गा नवरात्रि 2022)

जिस प्रकार से सभी भक्त जानते हैं कि हमारे शिव कितने भोले हैं ठीक उसी प्रकार से हमारी जगत जननी माता मां दुर्गा तो हमारी माता है।

उनमें ममता और प्रेम का इतना प्रगाढ़ सागर है कि वह अपने भक्तों को अर्थात अपने सभी बच्चों को हमेशा स्नेह और सुख प्रदान करती है।

नवरात्रि की महिमा (दुर्गा नवरात्रि 2022)

परंतु यह नवरात्रि हमारे घर में ना केवल सुख शांति संपदा लाते हैं अपितु माता स्वयं हमें ऐसी बुद्धि प्रदान करती है जिससे हमारी शिव के प्रति प्रेम और प्रगाढ़ हो।

परंतु इस बार 2022 के नवरात्रि बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार माता स्वयं घोड़े पर आएंगी, जो अन्य नवरात्रों में नहीं होता है क्योंकि माता का घोड़े पर आना यह साफ संकेत देता है कि सभी भक्तों को वह घोड़े की रफ्तार से सुख संपदा और वैभव प्रदान करेगी।

देवी भागवत में यह सुंदर कथा आती है कि किस प्रकार से नवरात्रि का महत्व है और ज्योति अखंड ,जोहार और कलश का भी अपना ही एक अलग महत्व है।

देवी भागवत में यह विवरण आता है कि नवरात्रि के शुभ दिनों में जो भी भक्त अपने घर में कलश की स्थापना करता है उसके घर में ना केवल स्वयं माता जगत जननी आती है अपितु ब्रह्मा विष्णु महेश और उनके साथ साथ 33 कोटि देवी देवताओं का भी आगमन होता है।

देवी भागवत में यहां विवरण आता है कि जब भी भक्त अखंड ज्योति जलाए तो उसकी दिशा हमेशा पूरब में रखें, क्योंकि जब अखंड ज्योति की दिशा पूरब में होती है तो वह घर में सुख शांति संपदा वैभव लाती है और आयु की वृद्धि करती है और अकाल मृत्यु से भक्तों को बचाती है। भूलकर भी भक्तों को इसकी दिशा दक्षिण की तरफ नहीं रखनी चाहिए।

शिव महापुराण में कलश को लेकर बहुत ही सुंदर कथा आती है।

कथा में बहुत ही सुंदर विवरण होता है जब माता पार्वती कहती है कि है शिव हे मेरे आराध्य आप यह जानते हैं कि जहां जहां मेरा निवास होता है वहां पर आप का निवास निश्चित ही रूप से होता है , परंतु इसके उलट जहां जहां पर आप का निवास होता है वहां पर मेरे निवास की तो कोई प्रतिलिपि ही नहीं दिखती।

तब शिव माता पार्वती को बहुत ही सुंदर उत्तर देते हैं शिव कहते हैं कि हे पार्वती जिस प्रकार से शक्ति और शक्तिमान को अलग नहीं किया जा सकता ठीक उसी प्रकार से शिव और पार्वती का अलग होना असंभव है , इसलिए तुम यह जानती हो कि जहां कहीं पर भी मेरा निवास होता है तो वहां पर कलश का निवास भी अवश्य होता है , और उस कलश में ना केवल मेरा निवास पर अपितु ब्रह्मा विष्णु और 33 कोटि देवी देवताओं का भी निवास होता है।

जहां पर कलश के मुख पर अर्थात जहां पर नारियल रखा रहता है उसके सबसे ऊपरी भाग पर स्वयं विष्णु विराजमान रहते हैं, उस के मध्य भाग में मेरा निवास होता है फिर उसके नीचे ब्रह्मा जी का निवास होता है, और उसके अग्रभाग में 33 कोटि देवी देवताओं का निवास होता है।

कैसे जब ब्रह्मा जी ने इस पृथ्वी का निर्माण किया था तभी से कलश की सुंदर कथा विद्यमान है!!!!

कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का निर्माण किया तभी शिव जी ने इसी वक्त पर एक मिट्टी के कलश का निर्माण किया, वह निर्माण करते वक्त यह प्रमाणित किया कि किस प्रकार से कलश शुभ फलदाई है।

किस प्रकार से हम नवरात्रों में हम अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं और हमारे कार्य में आ रही बाधाओं को दूर कर सकते हैं?

एक कथा ऐसी भी आती है जहां पर वर्णन आता है कि जो नवरात्रि के नियमों का श्रद्धा पूर्वक पालन करता है और माता की आराधना करता है तो उससे मिला हुआ पुण्य और उसका भाग पितरों को भी समर्पित होता है।

और वह इसे पाकर इतने प्रसन्न होते हैं कि वह अपने वंशजों को खूब सारी मंगलकामनाएं और आशीर्वाद देते हैं।

इसलिए देवी भागवत में जो स्मरण आता है कि नवरात्रि के ठीक 1 दिन पहले जो अमावस्या आती है उसमें भक्तों को श्रद्धा पूर्वक एक कटोरी में चावल रखकर उसमें कपूर जलाकर उसे छोड़ दे, और अगले दिन की प्रातः काल होते से ही वह चावल पशु पक्षियों को दे दे।
पशु पक्षियों को दिए गए यह चावल हमारे पितरों को समर्पित होते हैं और हमारे पितरों को बहुत ही अधिक मात्रा में प्रसन्नता और सुख प्रदान करते हैं।

इसलिए यह नवरात्रि हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि हमें ना केवल जगत जननी माता की आराधना करने का अवसर प्राप्त होता है अपितु हम हमारे पितरों को प्रसन्न कर हमारे कार्य में आ रही समस्त बाधाओं को दूर करते हैं और हमारे पापों को भी काटते हैं।

नवरात्रि की महिमा (दुर्गा नवरात्रि 2022)

अंत में सभी भक्तों को नवरात्रि की हार्दिक हार्दिक शुभेच्छा, माता जगत जननी मां दुर्गा आपके घर में सुख ,संपदा , वैभव का आगमन करें और विशेष तौर पर वह शिव के प्रति हमारे प्रेम और आस्था को और प्रगाढ़ करें बस यही आशा करते हैं।

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