Sheetla Saptami par bhul ke bhi na kare ye kaam

शीतला सप्तमी पर भूल के भी ना करे ये काम | Sheetla Saptami par bhul ke bhi na kare ye kaam – Pandit Pradeep Ji Mishra 2022

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जानिए शीतला सप्तमी के बारे में

शीतला सप्तमी ही केवल एक ऐसा देवास होता है जिस दिन बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।

Sheetla Saptami 2022

शीतला सप्तमी के दिवस पर घरो में के तरह तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाये जाते हैं।

इनमें हलवा, पूरी, दही बड़ा, पकौड़ी, पुए रबड़ी आदि बनाया जाता है।

महिलाएं इस दिवस पर शीतला माता की विधि-विधान से आराधना/पूजा करती हैं।

अगले दिन प्रातःकाल में महिलाएं इन चीजों का भोग शीतला माता को लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

इस दिन घर के सारे सदस्य भी बासी भोजन ग्रहण करते हैं।

इसी वजह से इसे बासौड़ा पर्व भी कहते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता की कृपा से धन में बढ़ोतरी होती है एवं बीमारियों से मुक्ति मिलती है।

शीतला सप्तमी 2022 शुभ मुहूर्त

शीतला सप्तमी 2022 प्रारम्भ तिथि 24 मार्च, 2022
02:16 AM बजे
शीतला सप्तमी 2022 समाप्त तिथि 25 मार्च, 2022
12:09 AM बजे

शीतला सप्तमी पर ऐसे करे पूजा

  1. प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  2. रसोईघर की अच्छी तरह से सफाई करके पूजा की सामग्री वहीं इकट्ठा कर लें।
  3. ऐसी मान्यता है कि शीतला माता की पूजा करने से देवी अन्नपूर्णा की कृपा हमेशा बनी रहती है।
  4. देवी शीतला को आटे का दिया बनाकर चढ़ाया जाता है। इस दिए को जलाते नहीं है।
  5. आप मिट्टी के दीपक जला सकते हैं।
  6. इसके बाद लौटे में ठंडा पानी जरूर रखें।
  7. फिर फूल, धूप, टिका, चंदन आदि करें।
  8. फिर माता को ठंडे खाने का भोग लगाएं।
  9. भोग में आप पुआ, पकौड़े, चावल आदि बना सकते हैं।
  10. कई जगहों पर लोग रात भर जागकर माता की पूजा, भजन आदि करते हैं।

शीतला सप्तमी पर इन बातों का रखे ध्यान

जैसे कि हम सब जानते हैं कि शीतला सप्तमी के दिन माता को ठंडे खाने का भोग लगता है|

इसलिए भूलकर भी इस दिन गर्म खाने का प्रसाद माता को न चढ़ाएं|

गर्म खाना खाने से भी बचें।

इसके अलावा आपको इस बात का भी ध्यान रखे कि इस दिन आपके घर में चूल्हा न जले।

स्नान करने के लिए भी आप ठंडे पानी का इस्तेमाल करें।

शीतला सप्तमी का महत्‍व

स्‍कंद पुराण में शीतला माता को चेचक, खसरा और हैजा जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने वाली देवी के रूप में माना गया है।

माताएं बच्‍चों की दीर्घायु और उन्‍हें रोगमुक्‍त रखने के लिए इस दिन व्रत भी रखती हैं।

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