घर में क्यों होना चाहिए शिवलिंग

घर में क्यों होना चाहिए शिवलिंग – शिवलिंग की महिमा

Posted by

घर में क्यों होना चाहिए शिवलिंग, शिवलिंग की महिमा |

जिस प्रकार से एक मकान को घर तभी कहा जाता है जब उस मकान में लक्ष्मी का निवास हो।

जिस प्रकार से घर में लक्ष्मी के आगमन से धनसंपदा आती है परंतु उसी धनसंपदा को स्थिर और सदैव बनाए रखने के लिए घर में शिवलिंग का होना अति आवश्यक है।

शिव महापुराण और रूद्र पुराण के अनुसार ना केवल घर में शिवलिंग का होना आवश्यक है परंतु यह भी महत्वपूर्ण है कि शिवलिंग की पूजा अर्चना और भजन कैसे किया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार समाज को चार वर्णों में विभाजित किया गया है ब्राह्मण, क्षत्रिय ,वैश्य ,शूद्र।

शिव महापुराण के अनुसार अगर भक्त भक्ति भाव और श्रद्धा से मिट्टी के द्वारा शिवलिंग का निर्माण करता है तो स्वयं शिव उस में विराजमान होते हैं।

और भक्तों को वह अवसर प्रदान करते हैं कि वह उनकी सेवा कर सके।

शिव महापुराण के अनुसार ब्राह्मण को ऐसी मिट्टी का प्रयोग कर शिवलिंग को बनाना चाहिए जिसके अंदर सफेदी हो ,क्षत्रिय को शिवलिंग ऐसी मिट्टी से बनाना चाहिए जिस मिट्टी में लाल अवशेष हो या वह मिट्टी लाल हो, वैश्य को शिवलिंग का निर्माण उस मिट्टी से करना चाहिए जिस मिट्टी का रंग पीला हो और ठीक उसी प्रकार शूद्र को शिवलिंग का निर्माण काली मिट्टी से करना चाहिए।

शिव महापुराण के अनुसार अलग-अलग मिट्टी का चयन इसलिए किया जाता है क्योंकि जिस प्रकार मनुष्य को अपने प्रारब्ध जानने के लिए राशि फलों पर निर्भर होना पड़ता है उसी प्रकार अलग-अलग मिट्टी के बने हुए शिवलिंग विशेष वर्ण को विशेष गुण के लाभ प्रदान करते हैं।

और अगर घर में शिवलिंग स्थापित है और उसकी पूजा-अर्चना नियमित होती है तो उस घर में धन संपदा वैभव हमेशा बने रहते हैं परंतु भक्तों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस दीपक से वह शिव की आराधना करता है वह दीपक बार बार ना बदले अपितु उसे एक ही दिया निरंतर उपयोग में लाना चाहिए इससे धन संपदा वैभव का क्षय नहीं होता।

भक्तों के मन में कई बार यह प्रश्न आते हैं कि कैसा शिवलिंग घर में स्थापित किया जाए क्या उस शिवलिंग पर सर्प होना अनिवार्य है या बिना सर्प के शिवलिंग की भी पूजा अर्चना करी जा सकती है।

सूत्र पुराण इसका बहुत ही विस्तृत वर्णन करता है रूद्र पुराण के अनुसार अगर शिवलिंग है तो उस पर सर्प हमेशा से विराजमान रहेगा।

इसलिए शिवलिंग पर सर्प हो या ना हो परंतु उसकी पूजा-अर्चना करना अनिवार्य है।

कई बार भक्तों के मंदिरों में देखा जाता है कि वह पीतल का शिवलिंग ले आते हैं जहां जो पोला होता है, शिव महापुराण और उत्तर पुराण विशेष तौर पर यह जोर देते हैं कि शिवलिंग कभी भी पोला ना हो वह ठोस होना आवश्यक है।

क्योंकि अगर शिवलिंग ठोस नहीं है तो घर में दुखों का आगमन हो सकता है।

कई बार भक्तों के मन में यह भी प्रश्न आता है कि शिवलिंग का आकार कितना बड़ा हो, तो शास्त्र इसका बहुत ही सुंदर उत्तर देते हैं । शास्त्रों के अनुसार न केवल शिवलिंग अपितु घर के मंदिर में विराजमान विग्रह भी अंगूठे के आकार से छोटा होना चाहिए।

रूद्र पुराण के अनुसार जिस प्रकार शिवलिंग पर जल चढ़ाना महत्वपूर्ण है। ठीक उसी प्रकार उस पर बेलपत्र चढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि पुराणों के अनुसार जब पार्वती माता के नेत्रों से अश्रुओ की जलधारा निकली तो उन असुरों की जलधारा से बेलपत्र पौधे का उद्गम हुआ।

शिव महापुराण में तो यह भी वर्णन आता है कि जब शिव के नेत्रों से अश्रु की जलधारा निकली तो उन असुरों की जलधारा से रुद्राक्ष वृक्ष का उद्गम हुआ।

अगर घर में शिवलिंग है तो उसकी नियमित पूजा अर्चना भक्तों को करनी चाहिए और भक्तों को सदैव यह ध्यान रखना चाहिए कि वह शिव की पूजा अर्चना दक्षिण दिशा में बैठकर करें और शिव की जलधारी हमेशा उत्तर की ओर विराजमान हो क्योंकि शिवमहापुराण और रुद्र पुराण के अनुसार अगर भक्त शिव की पूजा अर्चना पूरब ,उत्तर या पश्चिम दिशा में बैठकर करता है तो उसे उस पूजा का मात्र 25% फल प्राप्त होता है।

परंतु अगर भक्त पूजा-अर्चना नियमों के साथ करता है और दक्षिण दिशा में बैठकर पूजा करता है तो उसका फल हजार प्रतिशत से भी अधिक होता है।

इसलिए भक्तों को सदैव यह स्मरण रखना चाहिए कि मंदिर में अगर शिवलिंग स्थापित है तो उसे विशेष तौर पर उसकी पूजा-अर्चना नियमित करना चाहिए।

अगर आपको यह लेख पसंद आया तो इसे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करे।

यह भी पढ़े:

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र की महिमा

पंडित प्रदीप जी मिश्रा का जीवन परिचय

कावड़ के जल से ये उपाय जरूर करें

भोले बाबा से हमें क्या प्रार्थना करना चाहिए

शीतला सप्तमी पर भूल के भी ना करे ये काम

|| श्री शिवाय नमस्तुभ्यं ||

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *