श्रावण महीने की नवमी को ये उपाय अवश्य करे

श्रावण महीने की नवमी को ये उपाय अवश्य करे – पंडित प्रदीप मिश्रा

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श्रावण महीने की नवमी को ये उपाय अवश्य करे – पंडित प्रदीप मिश्रा

सभी भक्तों के मन में यह हमेशा प्रश्न आता है कि श्रावण मास में हमें शिव को कैसे प्रसन्न करें शिव से क्या वरदान मांगे कि हमारे घर में सुख आनंद की प्राप्ति हो.

इसलिए कभी भी भक्तों को परेशान होने की या चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं रहती क्योंकि भक्तों की सारी इच्छाएं भगवान जानते हैं और वह शास्त्रों के माध्यम से जैसे रूद्र पुराण और महापुराण , शिवपुराण के माध्यम से बताते हैं कि किस प्रकार से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होगी.

जिस प्रकार से पहले के अनुच्छेदों में भी बताया गया कि कृष्ण को सबसे अत्यधिक प्रिय एकादशी है उसी प्रकार से शिव को श्रावण मास अति प्रिय है.

श्रावण मास की महिमा का गुणगान करते हुए तो स्वयं ब्रह्मा भी नहीं सकते क्योंकि श्रावण मास में मात्र एक लोटा जल शिव को अर्पित करने से वह इतने प्रसन्न हो जाते हैं कि भक्तों की सारी इच्छाएं पूर्ण कर देते हैं.

रुद्र पुराण ,शिव पुराण में कई बार यह वर्णन आता है कि अगर घर में धन संपदा की कमी है और और भक्तों की इच्छा है कि वह धनसंपदा की कमी को दूर कर अपने घर में लक्ष्मी का निवास रखें तो भक्तों को सावन मास में प्रत्येक सोमवार को शिव के मंदिर में घी का दीपक लगाना.

मात्र ठीक है दीपक लगाने से ही शिव इतने प्रसन्न हो जाते हैं कि उस भक्तों की धन संपदा की कमी को दूर कर उसे आनंद और प्रेम प्रदान करते हैं.

भक्तों को हमेशा श्रावण मास में यही प्रार्थना करना चाहिए कि है प्रभु जिस प्रकार से आप सावन मास में लगातार जल्द बरसाते रहते हैं ठीक उसी प्रकार से मेरे घर में भी सुख और आनंद की वर्षा कर दीजिए.

भक्तों को प्रार्थना में यह भी कहना चाहिए हे प्रभु आप को करुणानिधि और करुणानिधान कहते हैं, जिसका अर्थ यह है कि आप प्रत्येक मनुष्य में पात्र अपात्र को नहीं देखते हैं, आप तो इतने करुणानिधान है कि आप केवल भक्तों के भाव को देखते हैं कि किस भाव में वह मेरी सेवा करने के लिए आया है. तो हे प्रभु कृपया मुझ पर दया करें.

सावन मास की महिमा को लेकर रूद्र पुराण और महाशिवपुराण में यह भी कथा आती है कि किस प्रकार से
माता पार्वती शिव और गणेश जी को प्रसन्न कर हमारी इच्छाओं की पूर्ति करवा सकते हैं.

पूजनीय पंडित मिश्रा जी बताते हैं की जिस प्रकार से श्रावण मास में बेलपत्र की महिमा बहुत अधिक है उसी प्रकार से इसी मास में दूर्वा महिमा भी बहुत ही सुंदर है.

भक्तों को श्रावण मास की नवमी को विशेष तौर पर यह विधि विधान का पालन करना चाहिए.

कथा में यह भी वर्णन आता है कि जब भक्त मंदिर में शिव की पूजा अर्चना करने जाए तो उसे दूर्वा गणेश जी को अर्पित करने चाहिए और दूर्वा के दो भाग कर एक भाग अशोक सुंदरी को एक भाग शिवजी को अर्पित करना चाहिए.

और भक्तों को विशेष तौर पर हाटकेश्वर महादेव का चिंतन करना चाहिए, अगर भक्त श्रद्धा पूर्वक यह सब विधि करता है तो उसे संपूर्ण सुख और संपदा की प्राप्ति होती है.

उसके घर में सदा लक्ष्मी का निवास रहता है और रोग उसके घर में दूर-दूर तक नहीं फटकते.

दूर्वा को लेकर भी एक बहुत प्रसिद्ध कथा है, जब कुबेर को यह घमंड आ जाता है कि पूरे ब्रह्मांड में उनके जैसी धनसंपदा कहीं नहीं है तो शिव जी गणेश जी को उनके इस घमंड को तोड़ने के लिए भेजते हैं.

गणेश जी उनके निवास पर जाकर इतना अन्य प्रसाद ग्रहण करते हैं की अंत में कुबेर का सहारा घमंड नष्ट हो जाता है और वह शिवजी के पास जाकर याचना करने लगता है,

उस समय शिवजी अशोक सुंदरी के द्वारा दूर्वा गणेश जी को भेजती है, एक का एकमात्र उद्देश्य यही रहता है कि गणेश जी के पेट में जो उपज है उसे खत्म करना.

इस कथा का श्रवण करने मात्र से भक्तों को आनंद की प्राप्ति होती है

सावन मास की महिमा को लेकर रूद्र पुराण और महाशिवपुराण में यह भी कथा आती है कि किस प्रकार से माता पार्वती शिव और गणेश जी को प्रसन्न कर हमारी इच्छाओं की पूर्ति करवा सकते हैं.

पूजनीय पंडित मिश्रा जी बताते हैं की जिस प्रकार से श्रावण मास में बेलपत्र की महिमा बहुत अधिक है उसी प्रकार से इसी मास में दूर्वा महिमा भी बहुत ही सुंदर है.

कथा में यह भी वर्णन आता है कि जब भक्त मंदिर में शिव की पूजा अर्चना करने जाए तो उसे दूर्वा गणेश जी को अर्पित करने चाहिए और दूर्वा के दो भाग कर एक भाग अशोक सुंदरी को एक भाग शिवजी को अर्पित करना चाहिए.

और भक्तों को विशेष तौर पर हाटकेश्वर महादेव का चिंतन करना चाहिए, अगर भक्त श्रद्धा पूर्वक यह सब विधि करता है तो उसे संपूर्ण सुख और संपदा की प्राप्ति होती है.

उसके घर में सदा लक्ष्मी का निवास रहता है और रोग उसके घर में दूर-दूर तक नहीं फटकते.

दूर्वा को लेकर भी एक बहुत प्रसिद्ध कथा है, जब कुबेर को यह घमंड आ जाता है कि पूरे ब्रह्मांड में उनके जैसी धनसंपदा कहीं नहीं है तो शिव जी गणेश जी को उनके इस घमंड को तोड़ने के लिए भेजते हैं.

गणेश जी उनके निवास पर जाकर इतना अन्य प्रसाद ग्रहण करते हैं की अंत में कुबेर का सहारा घमंड नष्ट हो जाता है और वह शिवजी के पास जाकर याचना करने लगता है,

उस समय शिवजी अशोक सुंदरी के द्वारा दूर्वा गणेश जी को भेजती है, एक का एकमात्र उद्देश्य यही रहता है कि गणेश जी के पेट में जो उपज है उसे खत्म करना.

इस कथा का श्रवण करने मात्र से भक्तों को आनंद की प्राप्ति होती है.

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