पशुपति व्रत कैसे करे (संपूर्ण जानकारी)  पंडित प्रदीप मिश्रा

पशुपति नाथ जी का व्रत सोमवार को किया जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर साफ-सुथरे कपड़े को धारण करें।

पूजा की थाली में कुमकुम, अबीर ,गुलाल अश्वगंधा ,पीला चंदन ,लाल चंदन और थाली में ऐसा चावल रखें जो खंडित ना हो।

थाली में अगर धतूरा और आंकड़ा हो तो वह भी रखें।

भक्तों को यह भी ज्ञात होना चाहिए कि यही सामान हमें पूजा के लिए शाम को भी लगेगा इसलिए इसकी मात्रा अधिक रखें।

अगर भक्तगण यह पाते हैं कि शिवलिंग के आसपास सफाई नहीं है तो सबसे पहले भक्तों को सफाई की सेवा करनी चाहिए।

भक्तों को यह स्मरण होना चाहिए कि शिवलिंग का अभिषेक सबसे ऊपरी भाग पर जल डालकर करें।

बहुत बार भक्तों के मन में यह संशय होता है कि बेलपत्र पूजा सामग्री का अभिन्न भाग है और बहुत बार यह भक्तों को उपलब्ध नहीं हो पाता है।

जो बेलपत्र शिवलिंग पर पहले से चढ़ा हुआ है उसे साफ करके भी शिवलिंग को अर्पित किया जा सकता है।

जब सुबह की आरती समाप्त हो जाए तो शाम को भी यही प्रक्रिया पुनः करें।

पूजा की थाली में याद से 6 दिए रखें, जिनमें से 5 दिए भक्तों को मंदिर में प्रज्वलित करना है।

एक दिया जो बचा हुआ है उसे घर के दरवाजे के बाहर दाई तरफ प्रज्वलित करें।

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